“लिंगराज सर्व्हिसेस” द्वारा प्रस्तुत की गई जानकारी
दूध अभिषेक पूजा भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र वैदिक विधि है, जिसमें पारंपरिक पीतल के पात्रों का उपयोग करके शुद्ध दूध की मंद और निरंतर धारा के रूप में शिवलिंग पर विधिपूर्वक अभिषेक किया जाता है। संपूर्ण विधि के दौरान अनुभवी पंडितों द्वारा शक्तिशाली शिव मंत्रों का जाप किया जाता है, जिससे मंदिर परिसर में अत्यंत आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण होता है। पूजनीय लिंगराज मंदिर में दूध अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्तों का ऐसा विश्वास है कि इस पवित्र अर्पण से दैवी आशीर्वाद प्राप्त होते हैं, नकारात्मक ऊर्जा का निवारण होता है और शांति, समृद्धि तथा आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है। शैव उपासना में दूध को पवित्रता, पोषण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। अभिषेक के समय भगवान शिव को दूध अर्पित करना समर्पण, कृतज्ञता और दैवी कृपा की कामना व्यक्त करने का प्रतीक है।
यह विधि भक्तों के नाम से संकल्प लेकर प्रारंभ की जाती है। इसके पश्चात अधिकृत पंडितजी वैदिक परंपरा के अनुसार मंत्रोच्चार करते हैं। भक्त शिवलिंग पर दूध अर्पित करके इस पूजा में सहभाग करते हैं। अभिषेक के दौरान पवित्र मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियों के साथ शिवलिंग पर दूध अर्पित किया जाता है। इसके बाद भक्त भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
नीचे लिंगराज मंदिर के अधिकृत पंडितों के प्रोफाइल दिए गए हैं, जिन्हें परंपरा के अनुसार यह पूजा करने का धार्मिक अधिकार प्राप्त है।
लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर, ओडिशा
प्रातःकाल: 06:00 से 09:30
दोपहर: 02:00 से 04:00
प्रातः 5:00 से रात्रि 9:00
प्रति बुकिंग केवल 2 वयस्क व्यक्ति
लगभग 5 से 7 मिनट
₹2,497/- (इसमें पंडितजी दक्षिणा और पूजा सामग्री शामिल है। किसी भी प्रकार की अतिरिक्त दक्षिणा आवश्यक नहीं है।)
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