लिंगराज मंदिर

लिंगराज मंदिर

“लिंगराज सर्व्हिसेस” द्वारा प्रस्तुत जानकारी


लिंगराज मंदिर का इतिहास और वास्तुकला

लिंगराज मंदिर भारत के सबसे भव्य और पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है और ओडिशा के भुवनेश्वर शहर का आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर भक्ति, वास्तुकला की उत्कृष्टता और सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है, जो आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं को प्रेरित करता है। लिंगराज नाम का शाब्दिक अर्थ “लिंगों का राजा” है, जो यह दर्शाता है कि यहाँ पवित्र शिवलिंग के रूप में पूजे जाने वाले भगवान शिव सर्वोच्च दैवी शक्ति हैं।

लिंगराज मंदिर की स्थापत्यकला

यह मंदिर पारंपरिक कलिंग स्थापत्य शैली का सूक्ष्म प्रभाव प्रदर्शित करता है, जो इसके भव्य पत्थर के निर्माण में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। गहरे रंग के पत्थरों का उपयोग करके निर्मित यह मंदिर भुवनेश्वर शहर के विस्तृत क्षेत्र में प्रमुखता से स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 55 मीटर है, जो इसे अत्यंत भव्य बनाती है। मंदिर परिसर में अनेक छोटे मंदिर स्थित हैं, जो विभिन्न देवताओं की उपासना के लिए समर्पित हैं, जिससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक चेतना का वातावरण निर्मित होता है। मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई सूक्ष्म मूर्तियाँ और शिलालेख उत्कृष्ट कारीगरी और कलात्मक कौशल का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। मंदिर परिसर के भीतर स्थित सभी उपमंदिर मजबूत निर्माण के हैं और आज भी अच्छी स्थिति में संरक्षित हैं। मुख्य प्रवेश द्वार, जिसे सिंहद्वार के नाम से जाना जाता है, स्थापत्य की दृष्टि से अत्यंत आकर्षक है। इस द्वार के दोनों ओर सिंहों की नक्काशी की गई है, जहाँ सिंहों को हाथियों पर विजय प्राप्त करते हुए दर्शाया गया है, जो शक्ति और वर्चस्व का प्रतीक है। विशेष रूप से, स्थापत्य संरचना के कारण उत्पन्न दृष्टि भ्रम के चलते यह मंदिर अपने वास्तविक आकार से कहीं अधिक विशाल प्रतीत होता है, जिससे इसकी भव्यता और दृश्य आकर्षण में वृद्धि होती है। संपूर्ण मंदिर परिसर को कठोरता से पूर्व–पश्चिम अक्ष पर आधारित योजना के अनुसार निर्मित किया गया है और इसमें चार स्वतंत्र संरचनाएँ हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशिष्ट पवित्र महत्व है।

देउळ / गाभारा (गर्भगृह)

देउळ / गाभारा मंदिर का गर्भगृह है, जहाँ पवित्र शिवलिंग स्थापित है। यहाँ भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों विराजमान हैं। यह पवित्र कक्ष मंदिर का आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है, जहाँ भगवान शिव की लिंग स्वरूप में तथा भगवान विष्णु की शालिग्राम स्वरूप में पूजा की जाती है।.

जगमोहन

जगमोहन को सभामंडप कहा जाता है, जहाँ श्रद्धालु प्रार्थना एवं वंदना के लिए एकत्रित होते हैं और मंदिर में होने वाले विधियों तथा धार्मिक अनुष्ठानों का दर्शन करने का लाभ प्राप्त करते हैं।

नाटमंडप

नाटमंडप नृत्यगृह है, जहाँ पारंपरिक रूप से धार्मिक विधियों के एक अभिन्न अंग के रूप में तथा सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के प्रतीक स्वरूप विधिगत नृत्य प्रस्तुत किए जाते थे।

भोगमंडप

भोगमंडप अर्पण मंडप है, जहाँ पवित्र भोजन / नैवेद्य (भोग) तैयार करके देवता को अर्पित किया जाता है और इसके पश्चात् उसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

इतिहास और उत्पत्ति

लिंगराज मंदिर का निर्माण ईसा की 11वीं शताब्दी में सोमवंशी राजा जजाती केसरी के संरक्षण और प्रायोजन में किया गया था। यह मंदिर प्राचीन कलिंग क्षेत्र की मंदिर-वास्तुकला के उत्कर्ष का प्रतीक है और ओडिशा की गहराई से जमी हुई आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाता है। सदियों से यह मंदिर शैव उपासना का एक जीवंत केंद्र बना हुआ है और पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही विधियों, परंपराओं और श्रद्धाओं को आज भी संरक्षित किए हुए है।

लिंगराज मंदिर के अधिकृत पंडित

भुवनेश्वर स्थित पवित्र लिंगराज मंदिर में सभी धार्मिक विधियाँ और पूजाएँ केवल मंदिर के अधिकृत गुरुजी द्वारा ही संपन्न की जाती हैं। इन गुरुजियों के पास पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही पूजा करने की पारिवारिक परंपरा है और उन्हें मंदिर उपासना का एकमात्र संरक्षक माना जाता है। मंदिर की पवित्रता, धार्मिक विधियों और वैदिक परंपराओं को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी इन्हीं पर सौंपी गई है। केवल यही मान्यता प्राप्त और अधिकृत गुरुजी लिंगराज मंदिर परिसर में पूजा, अभिषेक तथा अन्य पवित्र धार्मिक अनुष्ठान करने का धार्मिक अधिकार रखते हैं।

Online & Offline Puja Booking

Note:

  • Each booking permits only one couple or two individuals only. Puja booking details will be shared only after successful puja booking done.
  • All required puja samagri is included in the puja charges.
  • All the pandits listed on this website are verified priests who perform puja rituals inside the temple.
  • Rudrabhishek, Jalabhishek & Panchamrit Abhishek are conducted inside the temple’s Garbhagriha and can touch the Shivling during the ritual only for Offline pujas mode.
  • You must reach the designated puja location as coordinated and communicated by the Pandit Ji, for offline puja booking’s.(recommended to call panditji before 1 day of your puja date.) Puja bookings are Non-Refundable.
  • For offline puja bookings, you must reach the puja location 5 hours before the temple closing time(recommended),as communicated and guided by panditji.

अधिकृत गुरुजी का महत्व

लिंगराज मंदिर की उपासना परंपराएँ अनुशासित और अधिकृत पुरोहित व्यवस्था के माध्यम से सदियों से संरक्षित की गई हैं।

लिंगराज मंदिर में पूजा के लिए ऑनलाइन पंडित बुकिंग

श्रद्धालु अब भुवनेश्वर स्थित पवित्र लिंगराज मंदिर में पूजा और अभिषेक कराने के लिए Lingarajtemple.org वेबसाइट के माध्यम से अधिकृत पंडितजी की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। सभी पूजाएँ केवल मंदिर द्वारा अधिकृत गुरुजियों द्वारा ही संपन्न की जाती हैं और इन्हें पारंपरिक वैदिक विधियों तथा धार्मिक रीतिरिवाजों का कठोरता से पालन करते हुए किया जाता है।

पवित्र परंपराओं का संरक्षण

लिंगराज मंदिर के अधिकृत पंडित 11वीं शताब्दी से निरंतर चली आ रही प्राचीन शैव परंपराओं के संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी सेवा के कारण प्रत्येक विधि भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक पवित्रता के साथ संपन्न की जाती है।

दक्षिणा से संबंधित जानकारी

प्रत्येक पूजा की दक्षिणा (मानधन) बुकिंग के समय स्पष्ट रूप से उल्लेखित की जाती है, जिससे श्रद्धालुओं के लिए पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। ऑनलाइन गुरुजी बुकिंग की सुविधा केवल Lingarajtemple.org वेबसाइट पर ही उपलब्ध है।

लिंगराज मंदिर में धार्मिक अभिषेकों के प्रकार

लिंगराज मंदिर में धार्मिक अभिषेकों के प्रकार भुवनेश्वर स्थित पवित्र लिंगराज मंदिर में भगवान शिव की उपासना का केंद्रबिंदु अभिषेक विधियाँ हैं। ये पवित्र अर्पण दैवी आशीर्वाद प्राप्त करने, आध्यात्मिक शुद्धिकरण और अंतःशांति के लिए अत्यंत भक्तिभाव से किए जाते हैं। प्रत्येक अभिषेक का अपना विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व होता है और इसे प्राचीन शैव परंपराओं के अनुसार ही संपन्न किया जाता है।

1. जलाभिषेक पूजा

जलाभिषेक भगवान शिव की उपासना का सबसे मूलभूत रूप है, जिसमें पवित्र शिवलिंग पर शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है। यह विधि दैवी ऊर्जा के शमन तथा शरीर, मन और आत्मा के शुद्धिकरण का प्रतीक है।

श्रद्धालु जलाभिषेक निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए करते हैं:

2. दूध अभिषेक पूजा

दूध अभिषेक में पवित्र शिवलिंग पर गाय का शुद्ध दूध अर्पित किया जाता है, जो पवित्रता, पोषण और भक्ति का प्रतीक है। यह विधि भगवान शिव की वैश्विक ऊर्जा को शांत करती है और श्रद्धालुओं को समृद्धि प्रदान करती है, ऐसी मान्यता है।

दूध अभिषेक सामान्यतः निम्नलिखित कारणों से किया जाता है:

3. पंचामृत अभिषेक पूजा

पंचामृत अभिषेक में दूध, दही, मध, घी और शक्कर के पवित्र मिश्रण से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। ये पाँच तत्व जीवन के पाँच तत्वों और आध्यात्मिक संतुलन के प्रतीक माने जाते हैं।

यह अभिषेक निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए किया जाता है:

4. रुद्राभिषेक पूजा

रुद्राभिषेक भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पूजनीय वैदिक पूजा है, जिसे यजुर्वेद के रुद्र मंत्रों तथा नमकम्–चमकम् के जप के साथ संपन्न किया जाता है। इस विधि के दौरान जल, दूध और पंचामृत सहित पाँच पवित्र द्रव्यों का अर्पण किया जाता है।

ऐसी मान्यता है कि रुद्राभिषेक से निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:

5. लघुरुद्र अभिषेक पूजा

लघुरुद्र अभिषेक भगवान शिव की उपासना का एक उन्नत और अत्यंत प्रभावशाली स्वरूप है, जिसमें रुद्र मंत्रों का अनेक बार जप किया जाता है तथा विस्तृत अभिषेक विधियाँ संपन्न की जाती हैं। यह पूजा अनुभवी पंडितों के मार्गदर्शन में वैदिक विधि के अनुसार की जाती है।

यह विधि निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए की जाती है:

लिंगराज मंदिर की कथा

गर्भगृह (पवित्र आंतरिक मंदिर) में स्थित पवित्र शिवलिंग के बारे में यह श्रद्धा है कि वह स्वयंभू रूप में प्रकट हुआ है, इसी कारण उसे स्वयंभू के रूप में अत्यंत पवित्र स्थान प्राप्त है। इस दैवी उत्पत्ति के कारण श्रद्धालु इस लिंग की उपासना भगवान शिव और भगवान विष्णु के संयुक्त स्वरूप के रूप में करते हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार के समीप एक भव्य त्रिशूल दिखाई देता है, जिसके मध्य में भगवान शिव की मूर्ति स्थित है और दोनों ओर भगवान विष्णु की मूर्तियाँ स्थापित हैं। यह मंदिर दो प्रमुख आध्यात्मिक परंपराओं के समन्वय का प्रभावशाली प्रतीक है, इसलिए इसे हरि–हर स्वरूप में पूजा जाता है। इस पवित्र अवधारणा में हरि भगवान विष्णु का और हर भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करता है, जो एक साथ मिलकर दैवी एकत्व को दर्शाते हैं। इस शिवलिंग की प्रतिदिन दूध, जल और भांग के अर्पण के साथ प्राचीन परंपराओं के अनुसार विधिपूर्वक पूजा की जाती है।

मंदिर परिसर के नाट मंदिर में प्राचीन देवदासी परंपरा के अवशेष आज भी संरक्षित हैं, जो मंदिर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समृद्धि को उजागर करते हैं। इसके अतिरिक्त, पार्श्व देवताओं के रूप में भगवान कार्तिकेय, भगवान गणेश और देवी पार्वती की स्थापना मंदिर के चारों ओर विभिन्न दिशात्मक कोनाडों में की गई है। प्रत्येक देवता को सुंदर वस्त्रों और अलंकारों से अत्यंत आकर्षक ढंग से सजाया गया है। भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक यह मंदिर विश्वभर से असंख्य श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यहाँ आने वाले भक्त इस पवित्र स्थल को घेरे हुई शांति और दैवी ऊर्जा का अनुभव करते हैं, जिससे उन्हें गहन आध्यात्मिक संतोष की अनुभूति होती है।

लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग से:

सबसे निकटवर्ती हवाई अड्डा बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (BBI) है, जो मुख्य रूप से घरेलू उड़ानों का संचालन करता है। यह हवाई अड्डा लिंगराज मंदिर से लगभग 3.5 से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यातायात की स्थिति के अनुसार टैक्सी या निजी वाहन से यह यात्रा सामान्यतः 15 से 20 मिनट में पूरी हो जाती है, जिससे हवाई मार्ग यात्रियों के लिए एक सुविधाजनक विकल्प बनता है।

रेल मार्ग से:

भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन भी एक आसानी से सुलभ आगमन केंद्र है। यह मंदिर रेलवे स्टेशन से लगभग 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और ऑटो-रिक्शा या टैक्सी द्वारा 10 से 20 मिनट में पहुँचा जा सकता है। शहर के मध्यवर्ती क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह मंदिर भुवनेश्वर के सबसे सुविधाजनक रूप से पहुँचे जा सकने वाले प्रमुख स्थलों में से एक माना जाता है।

बस मार्ग से:

भुवनेश्वर का मुख्य बस टर्मिनल बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बस टर्मिनल (BSABT) है, जिसे बारामुंडा बस स्टैंड या बारामुंडा ISBT के नाम से भी जाना जाता है। बारामुंडा क्षेत्र में स्थित यह बस टर्मिनल शहरांतर्गत तथा अंतरराज्यीय बस सेवाओं का प्रमुख केंद्र है और भुवनेश्वर को प्रमुख शहरों एवं पड़ोसी राज्यों से जोड़ता है। इस बस स्टैंड से यात्री टैक्सी या ऑटो-रिक्शा जैसे स्थानीय परिवहन माध्यमों द्वारा आसानी से लिंगराज मंदिर पहुँच सकते हैं।

मंदिर का समय:

सप्ताह के सभी दिन खुला रहता है: प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक

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